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इंदौर में संपत्ति और स्वत्व विवाद

इंदौर में संपत्ति विवाद सामान्यतः स्वत्व की घोषणा, कब्जे, बँटवारे, या विक्रय अनुबंध के विनिर्दिष्ट पालन के वाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, साथ ही वाद के निर्णय तक स्थिति बनाए रखने हेतु अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन दिया जाता है। चैंबर ऐसे मामलों में वादी और प्रतिवादी दोनों की ओर से कार्य करता है।

संदर्भित अधिनियम

  • संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882
  • विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963
  • रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908
  • सिविल प्रक्रिया संहिता 1908, आदेश 39 तथा आदेश 20 नियम 18
  • मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राजस्व अभिलेख में नामांतरण से स्वामित्व सिद्ध होता है?
नहीं। नामांतरण राजस्व वसूली के प्रयोजन से की गई प्रविष्टि है और यह दर्ज करती है कि भू-राजस्व देने का दायित्व किस पर है। इससे स्वत्व न तो उत्पन्न होता है, न अंतरित होता है, न समाप्त होता है। स्वामित्व का विवाद सिविल न्यायालय द्वारा स्वत्व के दस्तावेज़ों और साक्ष्य के आधार पर तय किया जाता है।
अचल संपत्ति के कब्जे के वाद की परिसीमा अवधि क्या है?
परिसीमा अधिनियम 1963 के अनुच्छेद 65 के अंतर्गत बारह वर्ष, उस तिथि से जब प्रतिवादी का कब्जा वादी के विरुद्ध प्रतिकूल हो जाता है। विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत वाद अलग है और बेदखली से छह माह के भीतर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
क्या विवादित संपत्ति की बिक्री रोकी जा सकती है?
सामान्य उपाय आदेश 39 नियम 1 और 2 के अंतर्गत अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन है, जिससे वाद के निर्णय तक अंतरण पर रोक लगे। निषेधाज्ञा मिलेगी या नहीं यह प्रथम दृष्टया मामले, सुविधा के संतुलन और क्षति की अपूरणीयता पर निर्भर करता है। इसके अतिरिक्त वाद लंबित रहते संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 52 का लिस पेंडेंस सिद्धांत लागू होता है, जिससे वाद के दौरान क्रय करने वाला परिणाम से आबद्ध रहता है।
विनिर्दिष्ट पालन के वाद और अग्रिम राशि की वसूली के वाद में क्या अंतर है?
विनिर्दिष्ट पालन का वाद न्यायालय से यह चाहता है कि विक्रेता को विक्रय-पत्र निष्पादित करने और सौदा पूरा करने हेतु बाध्य किया जाए। वसूली का वाद केवल दी गई राशि ब्याज और क्षतिपूर्ति सहित वापस माँगता है। दोनों की दिशा अलग है, और चुनाव न्यायशुल्क, परिसीमा तथा तत्परता और इच्छा के अभिवचन को प्रभावित करता है। यह निर्णय आरंभ में ही सोच-समझकर लिया जाना चाहिए।
क्या अपंजीकृत विक्रय अनुबंध का कोई उपयोग है?
विक्रय अनुबंध स्वयं स्वत्व अंतरित नहीं करता, और रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 49 के अंतर्गत अचल संपत्ति को प्रभावित करने वाला अपंजीकृत दस्तावेज़ उस संव्यवहार के साक्ष्य में ग्राह्य नहीं है। किंतु परंतुक ऐसे दस्तावेज़ को संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 53क के अंतर्गत भागिक निष्पादन के साक्ष्य के रूप में तथा विनिर्दिष्ट पालन के वाद में ग्राह्य बनाता है। यह स्थिति सीमित है और दस्तावेज़ की शर्तों पर निर्भर करती है।

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अंतिम अद्यतन: 2026-09-20

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