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इंदौर जिला न्यायालय में सिविल मुकदमे

इंदौर में सिविल वाद दावे के मूल्य के अनुसार व्यवहार न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, और अभिवचन, वाद-बिंदु निर्धारण, साक्ष्य, तर्क और निर्णय के चरणों से होकर गुजरता है। नगर लॉ चैंबर्स श्रेणी अ और श्रेणी ब के नियमित सिविल वादों, विविध न्यायिक प्रकरणों तथा निषेधाज्ञा और स्थगन के आवेदनों में कार्य करता है।

संदर्भित अधिनियम

  • सिविल प्रक्रिया संहिता 1908
  • विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963
  • परिसीमा अधिनियम 1963
  • मध्य प्रदेश सिविल न्यायालय अधिनियम 1958

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर जिला न्यायालय में सिविल वाद में कितना समय लगता है?
कोई निश्चित अवधि नहीं है। प्रतिवादित नियमित सिविल वाद प्रस्तुति से निर्णय तक सामान्यतः कई वर्ष चलता है, क्योंकि जवाब-दावा, वाद-बिंदु, साक्ष्य और तर्क प्रत्येक चरण अलग-अलग तिथियों पर लिया जाता है। जो मामले मौखिक साक्ष्य के बजाय दस्तावेज़ों पर आधारित होते हैं वे अपेक्षाकृत शीघ्र निपटते हैं। अंतरिम आवेदन वाद की तुलना में बहुत पहले निर्णीत हो जाते हैं।
श्रेणी अ और श्रेणी ब के सिविल वाद में क्या अंतर है?
यह वर्गीकरण न्यायालय की आर्थिक अधिकारिता दर्शाता है। श्रेणी अ के नियमित सिविल वाद व्यवहार न्यायाधीश वर्ग एक की अधिकारिता में आते हैं और श्रेणी ब के वाद व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो की अधिकारिता में। यह अंतर मूल्यांकन का है, विवाद की गंभीरता का नहीं।
क्या वाद प्रस्तुत होने के बाद समझौता हो सकता है?
हाँ। वाद किसी भी चरण पर समझौते द्वारा समाप्त किया जा सकता है और आदेश 23 नियम 3 के अंतर्गत राजीनामा डिक्री दर्ज की जा सकती है। न्यायालय मामलों को मध्यस्थता और लोक अदालत में भी भेजते हैं, जहाँ समझौता अवार्ड के रूप में दर्ज होता है।
सिविल वाद प्रस्तुत करने के लिए कौन से दस्तावेज़ आवश्यक हैं?
मोटे तौर पर वे दस्तावेज़ जो दावे को सिद्ध करते हैं: संबंधित अनुबंध या लिखत, संपत्ति विवाद में स्वत्व के दस्तावेज़, पक्षकारों के बीच पत्राचार, रसीदें और हिसाब, तथा पूर्व में दी गई कोई सूचना। वाद-पत्र के साथ वही दस्तावेज़ प्रस्तुत करने चाहिए जिन पर निर्भर रहना है, क्योंकि बाद में दस्तावेज़ प्रस्तुत करने हेतु आदेश 7 नियम 14 के अंतर्गत अनुमति आवश्यक होती है।
क्या पक्षकार को हर पेशी पर उपस्थित होना पड़ता है?
नहीं। सामान्य तिथियों पर अधिवक्ता पक्षकार की ओर से उपस्थित होता है। व्यक्तिगत उपस्थिति तब आवश्यक होती है जब पक्षकार का स्वयं का साक्ष्य दर्ज होना हो, जब न्यायालय व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दे, तथा मध्यस्थता या समझौता कार्यवाही में।

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अंतिम अद्यतन: 2026-09-20

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